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देखो ! बस इतना जान लो की अब तुम फ्रंट पेज़ पर हो...

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आज पूरा दिन इसी उधेड़बुन में काट दिया की आखिर मेरी तकदीर में है क्या?  जवाब तो वाजिब-गैरवाजिब बहुतेरे मिले। उन्ही जवाबो में एक नाम तुम्हारा भी आया, जो ज़िन्दगी की दहलीज़ पर आभासी झोके की तरह आया और तकदीर के मौसम को अपने सवालों से उथल-पुथल कर दिया। अब समझ में आया की सबकुछ तुम्हारे ही हाथो में है, मेरा सपना, मेरी सोच, मेरा विस्वास, मेरी तमन्नायें, मेरी उम्मीद। बहुत सारे ज़िन्दगी के रंग लेकर आया था ये आभासी झोंका, इन सभी रंगो में कितनी तरंगे थी और हां हर एक तरंग में थी तुम...सिर्फ तुम।

रात भर सोचता रहा तुझको, ज़हनों दिल मेरे रात भर महके..

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शाम का वक्त, घड़ी 7 के आस पास का वक्त बता रही थी। काले घने बादलो के बीच रह-रह कर चमकती बिजली के साथ हल्की हल्की फुहारें अठखेलियां करती लग रही थी। स्ट्रीट लाइट के साथ साथ, गुजरते वाहनों की हेडलाइट भी सड़क को जगमग कर रही थी। हल्की गीली सड़क पर वाहनों और लोगोंं की आवाजाही के बीच मद्धिम गति से चलते हम तुम।  वैसे तो अक्सर सड़क पर अकेले चलते है, लेकिन आज उपर से पड़ती हलकी फुहारों के बीच तुम्हारे साथ चलने का अपना ही आनंद था । प्रतिदिन की भांति आज भी घर पहुंचने की अनिवार्यता होते हुए भी आज पहुंचने की तनिक भी जल्दबाज़ी नहीं थी। तुम्हारे संग चलते हुए हंसी ठिठोली के बीच आज समय भी अजीब सी ख़ुशी का एहसास करा रहा था । बरबस मेरी निगाहें बार-बार तुम पर ही जाकर सुकून पा रही थी।  तुम्हे एकटक बस निहारते रहने का जी कर रहा था। आज भी तुम हमेशा की तरह बहुत आकर्षक लग रही थी। पहली नजर से ही मैं तुम्हारे तरफ खींचा चला जा रहा था। आज भी तुम्हारे ऊपर से मैं अपनी नजरों को क्यों नहीं हटा पा रहा था ?? ऐसा क्या था उस समय, समझ ही नहीं आ रहा था। और तो और, मैं समझना भी नहीं चाहता था। बहुत कुछ कहना चाहता था त...

"तुम जैसा कोई नहीं है, ये तुम नहीं जानते...... तुम हो तो स्वर्ग यही है, ये तुम नहीं जानते...."

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कुछ वक्त साथ थे तुम्हारे। अब तुम यहाँ से बहुत दूर हो लेकिन ये दूरी फ़ासलो की नहीं है, ये दूरी लम्हो की है। तुम्हे बताना चाहता हूँ की मेरे आँखों में तुम्हारी मुस्कराहट के चंद ऐसे फ्रेम ठहर गए है जो मुझे कभी पागल सा बना देते है तुम्हारे प्यार में, तो कभी मेरी आँखों को सुकून से भर देते है। बहुत जल्दी ही  मेरे दिल को तुम्हारे साथ रहने की आदत सी पड़ गयी है, बहुत बेहतर लगाने लगा है तुम्हारे साथ, तुम्हारे जाने के बाद दिल भी भीतर से नम सा हो जाता है। मै ये सोचकर उदास नहीं बल्कि हैरान हूँ कि तुम मुझसे दूर कब की जा चुकी हो लेकिन इतना वक्त बीतने के बाद भी तुमको मेरा ख्याल नहीं आया। मुझे अभी भी यकीन नहीं होता की तुमने एक सन्देश भी नहीं भेजा मेरे पास। मै तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ जानती हो मेरे दिल में अभी भी उम्मीद जिन्दा है की तुम मुझे याद करोगी और सच कहूं तो मेरे जिंदगी की जरुरत भी सिर्फ तुम ही हो लेकिन याद रखना मै कभी भी तुमसे इससे ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा। रहा सवाल मेरे सन्देश ना भेजने या बात ना करने का तो उसके मायने तभी है जब उसमे तुम्हारी मर्ज़ी शामिल हो। इसलिए मै तब तक इंतजार करता ...

इक राह तो वो होगी, तुम तक जो पहुंचती है

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बहुत देर से सोच रहा था की इक जोरदार पोस्ट लिखूंगा तुम्हारे लिए , लेकिन अब जब लिखने बैठा हू तो सोच रहा हू की क्या लिख सकता हूं ?? सोचता था की भोपाल से यू ही विदा ले लेगे न कोई साथी और न कोई दोस्त, लेकिन जाते जाते एक से बढ़ के एक अकड़ू , बद्तमीज़ और घमंडी लोंगो के बीच तुम मिल ही गयी, दुनिया की सबसे खुशमिज़ाज़ दोस्त जिसके साथ रूह भी सुकून पाती है। बस कुछ ही महीने पहले की बात है जब देखा था पहली नजर तुम्हे। आज के इस भागम-भाग दौर के एकदम विपरीत जो हर वक्त दूसरे की मदद करने को तैयार रहती है , इंसान के नाते , इसके बदले चाहिए क्या ??? रूपये -पैसे या कोई कीमती चीज़ ...... नहीं नहीं कुछ नहीं सिर्फ चाहिए तो थोड़ा सा  सुकून , थोड़ा सा स्नेह और बस थोड़ा सा प्रेम। यही वजह है की जब भी मेरा मन उदाश होता है, या जब भी कोई दिल दुखाता है, तो दिल में ख्याल सिर्फ तुम्हारा आता है। सिर्फ तुम्हे याद करते है, घंटों ऐसे ही बीत जाते हैं , पता नहीं कब उदासियों की भी सुबह हो जाती है और मालूम भी नहीं पड़ता। तुम्हे इक बात बताये.... मुझे तूम्हारे हर उस अदा से मुहब्बत है , जो तुम से वाबस्ता है …. लोगों के हु...