शाम का वक्त, घड़ी 7 के आस पास का वक्त बता रही थी। काले घने बादलो के बीच रह-रह कर चमकती बिजली के साथ हल्की हल्की फुहारें अठखेलियां करती लग रही थी। स्ट्रीट लाइट के साथ साथ, गुजरते वाहनों की हेडलाइट भी सड़क को जगमग कर रही थी। हल्की गीली सड़क पर वाहनों और लोगोंं की आवाजाही के बीच मद्धिम गति से चलते हम तुम। वैसे तो अक्सर सड़क पर अकेले चलते है, लेकिन आज उपर से पड़ती हलकी फुहारों के बीच तुम्हारे साथ चलने का अपना ही आनंद था ।
प्रतिदिन की भांति आज भी घर पहुंचने की अनिवार्यता होते हुए भी आज पहुंचने की तनिक भी जल्दबाज़ी नहीं थी। तुम्हारे संग चलते हुए हंसी ठिठोली के बीच आज समय भी अजीब सी ख़ुशी का एहसास करा रहा था ।
बरबस मेरी निगाहें बार-बार तुम पर ही जाकर सुकून पा रही थी। तुम्हे एकटक बस निहारते रहने का जी कर रहा था। आज भी तुम हमेशा की तरह बहुत आकर्षक लग रही थी। पहली नजर से ही मैं तुम्हारे तरफ खींचा चला जा रहा था। आज भी तुम्हारे ऊपर से मैं अपनी नजरों को क्यों नहीं हटा पा रहा था ?? ऐसा क्या था उस समय, समझ ही नहीं आ रहा था। और तो और, मैं समझना भी नहीं चाहता था।
बहुत कुछ कहना चाहता था तुमसे लेकिन एकदम नजदीक आकर भी तुमसे कुछ भी नहीं कह पा रहा था, जब भी खूब शोरगुल होता था तो मैं धीमे से तुमसे बोल देता था और तुम सुन भी नहीं पाती थी।
यूं ही राह चलते-चलते तुम्हारी अँगुलियों के छुवन से एक अजीब सी अनुभूति होने से एक मासूम सी नज़र तुम्हारे खूबसूरत चेहरे पर ले जाने से चूकता नहीं था मैं। क्योंकि उस वक्त तुम्हारे अधरों पर उभरी मुस्कान के सामने काले बादलों के बीच घिरा खूबसूरत चाँद भी फीका नज़र आता था।
जानती हो तुम वो लम्हा, वो अंदाज़ तुम्हारा कुछ इस कदर दिल को छू गया है की तुम्हे एक पल के लिए भी भूल पाना असंभव सा प्रतीत हो रहा है। जब तुमने आँखों को आँखों मे डालकर एक हाथ से अपने उलझे बालों की एक लट को अपने गालो से हटाकर वापस गालो के बीच फंसाते हुए दूसरे हाथ से ऊपर आकाश के तरफ इशारा करके उस खूबसूरत चाँद को दिखा रही थी।
देखो न उस वक्त तो मौसम भी आशिकाना रूप में साथ-साथ चल रहा था घर जाने की स्थिति अभी भी नहीं बनी थी क्योंकि तुमसे दूर जाने की विवशता ने अंदर ही अंदर परेशान कर रखा था मुझे।
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