आज पूरा दिन इसी उधेड़बुन में काट दिया की आखिर मेरी तकदीर में है क्या? जवाब तो वाजिब-गैरवाजिब बहुतेरे मिले। उन्ही जवाबो में एक नाम तुम्हारा भी आया, जो ज़िन्दगी की दहलीज़ पर आभासी झोके की तरह आया और तकदीर के मौसम को अपने सवालों से उथल-पुथल कर दिया।
अब समझ में आया की सबकुछ तुम्हारे ही हाथो में है, मेरा सपना, मेरी सोच, मेरा विस्वास, मेरी तमन्नायें, मेरी उम्मीद।
बहुत सारे ज़िन्दगी के रंग लेकर आया था ये आभासी झोंका, इन सभी रंगो में कितनी तरंगे थी और हां हर एक तरंग में थी तुम...सिर्फ तुम।
Comments
Post a Comment